विष्णु के अवतार नाम और कथाएं

भगवान विष्णु के अवतार नाम और कथा, विष्णु के 10/24 अवतार कौन से हैं?

क्या आप जानते है “भगवान विष्णु के कितने अवतार हैं, विष्णु के अवतार नाम और कथा का वर्णन?” (How many incarnations of Lord Vishnu are there, description of incarnation name and story of Vishnu?), आप जानना चाहते हैं – भगवान विष्णु के 24 अवतार कौन से हैं, भगवान विष्णु के 10 अवतार नाम क्या है, या फिर भगवान श्रीहरि विष्णु के अवतार नाम और कथाएं के बारे में जानकारी।

जब-जब पृथ्वी पर पाप बड़ा है जब जब पृथ्वी पर संकट आया है तब-तब भगवान विष्णु जी ने अवतार लिया है और संकट को दूर किया है। श्रीहरि भगवान विष्णु जी और देवो के देव महादेव ने पृथ्वी पर अनेकों बार अवतार लिया है। वैसे भगवान विष्णु जी के मुख्य दश अवतार है, पुराणो मे कुल 24 अवतार के बारे में बताया गया है, जब कलयुग में पाप ज्यादा बड़ जायेगा तब भगवान विष्णु का 24 वा अवतार “कल्कि” नाम से कलयुग में अवतरित होना है। हिंदू धर्म में विभिन्न देवताओं के अवतार की मान्यता है। विष्णु जी के दश अवतार माने गये हैं इसलिए इन्हे दशावतार कहते हैं।

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्। परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे।

अर्थात – जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान हो जाता है, तब-तब सज्जनों के परित्राण और दुष्टों के विनाश के लिए मैं विभिन्न युगों में (माया का आश्रय लेकर) उत्पन्न होता हूँ।

भगवान विष्णु के कितने अवतार हैं?

प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के कुल 24 अवतार बताए गए हैं लेकिन इनमें प्रमुख 10 अवतार है। पहले तीन अवतार – मत्स्य, कूर्म और वराह प्रथम महायुग में अवतरित हुए। पहला महायुग सतयुग है। नरसिंह, वामन, परशुराम और राम दूसरे मतलब त्रेतायुग में अवतरित हुए। कृष्ण और बुद्ध द्वापरयुग युग में अवतरित हुए। वर्तमान में कलयुग चल रहा है, और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस युग के अंत में कल्कि अवतार होगा, जो एक ब्राह्मण के घर जन्म लेगा और पापियों का नाश करेगा।

विष्णु के 10 अवतार के नाम/दशावतार

भगवान विष्णु के प्रमुख दश अवतार है, विष्णु के 10 अवतार प्रमुख होने से उन्हें दशावतार भी कहते हैं। विष्णु के 10 अवतारों के नाम/Bhagwan Vishnu Ke Dash Avatar Name निम्न है –

  1. मत्स्य
  2. कूर्म
  3. वराह
  4. नरसिंह
  5. वामन
  6. परशुराम
  7. राम
  8. कृष्ण
  9. बुद्ध
  10. कल्कि

उक्त सभी भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार नाम है, लेकिन श्रीहरि विष्णु के उक्त अवतारों को मिलाकर 24 अवतार नाम है जिसे आप नीचे दी गई हेडिंग के पैराग्राफ में अवतार नाम और कथाएं सहित पढ़ सकते है।

भगवान विष्णु के 24 अवतार कौन से हैं?

भगवान विष्णु के 24 अवतार नाम निम्नानुसार है –

1- श्री सनकादि मुनि, 2- भगवान वराह अवतार, 3- नारद जी का अवतार, 4- नर-नारायण, 5- कपिल मुनि अवतार, 6- दत्तात्रेय अवतार, 7- यज्ञ, 8- ऋषभदेव, 9- आदिराज पृथु, 10- मत्स्य अवतार, 11- कूर्म अवतार, 12- भगवान धन्वन्तरी, 13- मोहिनी अवतार, 14- भगवान नृसिंह, 15- वामन अवतार, 16- हयग्रीव अवतार, 17- श्रीहरि अवतार, 18- परशुराम अवतार, 19- महर्षि वेदव्यास जी, 20- हंस अवतार, 21- श्रीराम अवतार, 22- श्रीकृष्ण अवतार, 23- बुद्ध अवतार, 24- कल्कि अवतार

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विष्णु के 24 अवतारों के नाम और कथा बताइए

1- श्री सनकादि मुनि

जब सृष्टि के आरंभ में पितामह ब्रह्मा जी ने अनेक लोकों की रचना करने तपस्या की उनके इसी तप से प्रसन्न होकर भगवान श्रीहरि विष्णु ने सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार नाम के चार मुनियों के रूप में अवतार लिया। इन्ही चारो को भगवान विष्णु का प्रथम अवतार माना जाता है.

2- भगवान वराह अवतार

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार विष्णु जी ने दूसरा अवतार “वराह” रूप में लिया था। जब राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुंद्र में छिपा दिया था इस संकट के समय भगवान ब्रह्मा जी की नाक से विष्णु भगवान वराह रूप में अवतरित हुए इसी समय देवी देवताओं और श्रीमुनियो ने भगवान के वराह रूपी अवतार से पृथ्वी को बचाने की प्रार्थना की, कुछ ही समय में पृथ्वी का पता लगाकर अपने दातों पर पृथ्वी को समुंद्र से बाहर ले आए।हिरण्याक्ष और भगवान वराह के बीच भयानक युद्ध हुआ, आखिर में हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को अपने खुरों से पानी को स्तंभित कर पृथ्वी को स्थापित कर दिया।

3- नारद जी का अवतार

धर्म ग्रंथो के हिसाब से नारद भगवान ब्रह्मा जी के सात मानस पुत्रों में से एक है, धर्म ग्रंथों के अनुसार देवर्षि नारद भी भगवान विष्णु के ही अवतार हैं। उन्होंने कठिन तपस्या से देवर्षि का पद प्राप्त किया है। वह भगवान श्रीहरि विष्णु जी के प्रिय भक्तो में से एक है, देवर्षि नारद जी ने धर्म के प्रचार प्रसार तथा लोक-हित के लिए कार्य किए।

4- नर-नारायण

शास्रो के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में श्रीहरि विष्णु जी ने धर्म की स्थापना के लिए दो अलग अलग रूपों में अवतार लिया, माथे पर जठा, हाथो में हंस, चरणों में चक्र धारण किए थे। ग्रंथो के हिसाब से उनका सम्पूर्ण वेष तपस्वियों के समान था, भगवान के इसी अवतरित रूम को नर नारायण का रूप कहते हैं।

5- कपिल मुनि अवतार

धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान विष्णु ने पांचवा अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया, कपिल मनु पिता का नाम महर्षि कर्दम व माता का नाम देवहूति था। भगवान कपिल के क्रोध से राजा सगर के साठ हजार पुत्र भस्म हो गए थे।

6- दत्तात्रेय अवतार

जब माता पार्वती, लक्ष्मी व सरस्वती को अपने पति व्रत्य पर बहुत गर्व हो गया था, तब भगवान विष्णु ने माताओं का अभिमान तोड़ने के लिए लीला रची, एक दिन नारद जी देवलोक गए और तीनो माताओं को कहा ऋषि अत्री की पत्नी अनुसुइया के सामने आपका सतीत्व कुछ भी नहीं है इसी बात को सुनकर तीनो माताओं ने अनुसुइया के पतिव्रत्य की परीक्षा लेनी चाही।तब तीनो माताओं के आग्रह पर तीनो देव ब्रह्मा विष्णु और महेश ऋषि अत्री के आश्रम पहुंचे, तीनो ने भिक्छुओ का रूप धारण कर अनुसुइया से भिक्षा मांगी लेकिन तीनो देवो ने शर्त रखी की आपको निर्वस्त्र होकर हमें भिक्षा देनी होगी। अनुसुइया ने सोंचा की साधुओं का अपमान न हो इस डर से उन्होंने अपने पति का स्मरण किया और बोला कि यदि मेरा पातिव्रत्य धर्म सत्य है तो ये तीनों साधु 6/6 महीने के बच्चे बन जाए।इतना बोलते ही तीनो देव शिशु बन गए और रोने लगे माता अनुसुइया ने उन्हें गोंद में लेकर स्तनपान कराया और पालने में झूला झुलाया, जब तीनों देव वापस नहीं लौटे तो देवियां चिंतित होने लगी, नारद जी ने देवियों को पूरी बात बताई, तीनों अनुसूइया के पास गई और क्षमा मांगी, तब देवी अनुसूइया ने तीनो देवो को पहले जैसे रूप में कर दिया।

7- यज्ञ

धर्म ग्रंथों के अनुसार श्रीहरि विष्णु के 7वे अवतार का नाम यज्ञ है। भगवान यज्ञ का जन्म स्वायम्भुव मन्वन्तर में हुआ था। स्वायम्भुव मनु की पत्नी शतरूपा के गर्भ से आकूति का जन्म हुआ। वे रूचि प्रजापति की पत्नी हुई। इन्हीं आकूति के यहां भगवान विष्णु यज्ञ नाम से अवतरित हुए.

8- ऋषभदेव

सस्त्रो के हिसाब से महाराज नाभि की कोई संतान नहीं थी, इस कारण उन्होंने अपनी धर्मपत्नी मेरुदेवी के साथ पुत्र की कामना से यज्ञ किया। यज्ञ से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने महाराज नाभि को वरदान दिया कि मैं ही तुम्हारे यहां पुत्र रूप में जन्म लूंगा। वरदान स्वरूप कुछ समय बाद भगवान विष्णु महाराज नाभि के यहां पुत्र रूप में जन्मे, उसका नाम ऋषभ (श्रेष्ठ) रखा।

9- आदिराज पृथु

सस्त्रों के अनुसार स्वायम्भुव मनु के वंश में अंग नामक प्रजापति का विवाह मृत्यु की पुत्री सुनीथा के साथ हुआ। उनके घर वेन नामक पुत्र हुआ। उसने स्वयं की पूजा करने के लिए कहा। तब महर्षियों ने मंत्र पूत कुशों से उसका वध कर दिया। तब महर्षियों ने पुत्रहीन राजा वेन की भुजाओं का मंथन किया, जिससे पृथु नाम पुत्र उत्पन्न हुआ। पृथु के दाहिने हाथ में चक्र और चरणों में कमल का चिह्न देखकर ऋषियों ने बताया कि पृथु के वेष में स्वयं श्रीहरि का अंश अवतरित है.

10- मत्स्य अवतार

मत्स्य अवतार का उल्लेख सर्वप्रथम शतपथ ब्राह्मण में मिलता है जब पृथ्वी विश्वव्यापी जल प्रलय से भयभीत हुई तो श्री हरि विष्णु भगवान ने मत्स्य (मछली) के रूप में अवतार लिया और मनु को इस आसन्न भय से सावधान किया। पृथ्वी के जलमग्न हो जाने पर सृष्टि के क्रम को पुनर्स्थापित करने के लिए मत्स्य अवतार ने मनु, उनके परिवार और सप्तर्षियों व वेदों को एक जलपोत द्वारा (जो मत्स्य के सिर पर निकले सिंग से रस्सी द्वारा आबद्ध था) सुरक्षित बचा कर ले आए।

11- कूर्म अवतार

धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुए) का अवतार लेकर समुद्र मंथन में सहायता की थी। पृथ्वी के जलमग्न होने के कारण पृथ्वी की कई अमूल्य वस्तुएं विश्व सिंधु के तल में समा गए थे जिसमें अमृत भी एक था, इन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए देवताओं और दानवों ने समुद्र मंथन की योजना बनाई समुद्र मंथन की योजना को क्रियान्वित करने हेतु विष्णु ने एक कूर्म(कछुए) का अवतार लिया, कूर्म के पीठ पर मंदराचल पर्वत को रखकर नागराज वासुकी को मंदराचल में लपेट कर समुद्र मंथन किया.समुद्र मंथन के फलस्वरुप देवताओं ने अमृत व अन्य वस्तुओं के साथ-साथ देवी लक्ष्मी को भी प्राप्त किया, अमृत बंटवारे को लेकर देवताओं और दानवों में युद्ध हुआ जिसमें देवताओं की जीत हुई। कूर्म (कछुए) के अवतार को ही भगवान का 11 वा अवतार माना गया है.

12- भगवान धन्वन्तरि

जब देवताओं और देवताओं ने मिलकर समुद्र मंथन किया समुद्र मंथन के दौरान अनेक प्रकार के रत्न निकले सबसे बाद में भगवान धन्वन्तरि अमृत लेकर निकले, धर्म ग्रंथो के इसी रूप को श्री विष्णु जी का 12 अवतार माना गया है.

13- मोहिनी अवतार

धर्म शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन के समय सबसे बाद में धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर निकले जैसे ही अमृत कलश मिला देवताओं और देते हुए अनुशासनहीनता और मारकाट मच गई। अमृत कलश इंद्र के पुत्र जयंत लेकर भागे उसके पीछे सभी देवता और दैत्य भागे। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया और सबको मोहित कर दिया और कहा कि यह अमृत कलश मुझे दे दीजिए तो मैं बारी-बारी से देवता व देत्यो को अमृत का पीला दूंगी। मोहिनी अमृत पान तो सिर्फ देवताओं को पिला रही थी, जबकि असुर समझ रहे थे कि वे भी अमृत पी रहे हैं।भगवान विष्णू के इसी मोहनी रूप को 13 अवतार माना गया है।

14- भगवान नृसिंह

विष्णु ने अपने भक्तों प्रह्लाद को बचाने के लिए नरसिंह के रूप में अवतार लिया प्रह्लाद के पिता हिरण्यकशिपु को वरदान प्राप्त था कि वह किसी देवता या दानव से, पशु या मानव से, दिन या रात में, भीतर या बाहर में, धरती या आकाश में, अस्त्र या शस्त्र से मारा नहीं जा सकता, वरदान प्राप्ति के बाद हिरण्यकशिपु पृथ्वी लोक में अत्याचार करने लगा।फिर भगवान विष्णु ने नरसिंग अर्थात नर का शरीर और सिंह का मुख धारण करके प्रकट हो गए उन्होंने संध्या समय में अपनी जांघों पर हिरण्यकशिपु के शरीर को रखकर अपने नाखूनों से फाड़ कर बंद किया।

15- वामन अवतार

राक्षसराज बली ने संसार पर आधिपत्य कर लिया और अत्यधिक तप दान के सहारे उसके अलौकिक शक्ति की ऐसी वृद्धि हुई कि उसने देवताओं तक को पीड़ित करना शुरू कर दिया। जब देवताओं ने अपनी रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की तब विष्णु ने वामन के रूप में अवतार लिया और बलि के सम्मुख प्रकट होकर 3 पग भूमि मांगी। बलि द्वारा दान की याचना स्वीकार करने पर वामन ने अपना विशाल रूप धारण कर पहले पग में पृथ्वी, दूसरे पग में आकाश और तीसरे भाग में महाबली के पूरे शरीर को मापकर उसे पाताल लोग भेज दिया।

16- हयग्रीव अवतार

धर्म शास्त्रों के अनुसार एक बार मधु और कैटभ नाम के दो शक्तिशाली दानव भगवान ब्रह्माजी से वेदों का हरण कर रसातल में पहुंच गए, वेदों का हरण हो जाने से ब्रह्माजी भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब भगवान ने हयग्रीव अवतार लिया। इस अवतार में भगवान विष्णु की गर्दन और मुख घोड़े के समान थी। तब भगवान हयग्रीव रसातल में पहुंचे और मधु-कैटभ का वध कर वेदों को वापस ले आए।

17- श्रीहरि अवतार

प्राचीन समय में त्रिकूट पर्वत की तराई में एक गजेंद्र अपनी हथिनियों के साथ रहता था। एक बार वह अपनी हथिनियों के साथ तालाब में स्नान करने गया। वहां एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया और पानी के अंदर खींचने लगा। गजेंद्र और मगरमच्छ का संघर्ष एक हजार साल तक चलता रहा। अंत में गजेंद्र ने भगवान श्रीहरि का ध्यान किया। प्राथना सुनकर श्रीहरि आए और अपने चक्र से मगरमच्छ का वध कर दिया।

18- परशुराम अवतार

भगवान विष्णु ने मानव रूप में जमदग्नि नामक ब्राह्मण के पुत्र परशुराम के रूप में अवतार लिया, परशुराम ने कात्र्यवीर्य नामक क्षत्रिय राजा की हत्या इसलिए कर दी थी कि उसने जमदग्नि से कामधेनु गाय बलात् छीन लिया था एवं उनके आश्रम को नष्ट कर दिया था। परशुराम ने पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करने की प्रतिज्ञा की और 21 कर्तवीर्य के वंशजों को परास्त किया।

19- महर्षि वेदव्यास जी

पुराणों में महर्षि वेदव्यास को भी भगवान विष्णु रूप माना गया है। महर्षि वेदव्यास ही मनुष्यों की उम्र और शक्ति को देखते हुए वेदों के विभाग किए इसी लिए इन्हें वेदव्यास भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत ग्रंथ की रचना भी की थी।

20- हंस अवतार

एक समय की बात है जब भगवान ब्रह्मा अपनी सभा में बैठे थे उसी समय उनके मानस पुत्र सनकादि आ गए और ब्रह्मा जी से मनुष्यों के मोक्ष के बारे में चर्चा करने लगे तब विष्णु जी महाहंस के रूप में प्रकट हुए और उन्होंने सनकादि मुनियों के प्रश्न का निवारण किया। तभी से भगवान हंस की पूजा की जाती है।

21- श्रीराम अवतार

श्रीलंका के राजा रावण के अत्याचारों से मानव जाति को बचाने के लिए विष्णु भगवान ने अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राम के रूप में अवतार लिया।रावण ने जब माता सीता का हरण कर लिया तब भगवान राम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ, भगवान राम ने युद्ध में रावण का वध कर दिया।

22- श्रीकृष्ण अवतार

श्री कृष्ण अवतार विष्णु के सभी अवतारों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है मथुरा के नरेश कंस जैसे दानव का वध करने, मानवता व लोक कल्याण की रक्षा करने हेतु विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया।महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथि बने और पूरी दुनिया को गीता का ज्ञान दिया।

23- बुद्ध अवतार

बुद्ध अवतार रूप में विष्णु का यह अंतिम अवतार है वैदिक कर्मकांड व यज्ञ से होने वाली बली हिंसक कृत्य को दूर करने के लिए विष्णु ने बुद्ध के रूप में अवतार लिया, भगवान बुद्ध ने मध्य मार्ग के अनुसरण पर बल दिया।

24- कल्कि अवतार

वर्तमान में कलयुग चल रहा है, और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस युग के अंत में कल्कि अवतार होगा, जो एक ब्राह्मण के घर जन्म लेगा और पापियों का नाश करेगा।

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FAQ,s

भगवान विष्णु के 24 अवतार कौन-कौन से हैं?

1- श्री सनकादि मुनि, 2- भगवान वराह अवतार, 3- नारद जी का अवतार, 4- नर-नारायण, 5- कपिल मुनि अवतार, 6- दत्तात्रेय अवतार, 7- यज्ञ, 8- ऋषभदेव, 9- आदिराज पृथु, 10- मत्स्य अवतार, 11- कूर्म अवतार, 12- भगवान धन्वन्तरी, 13- मोहिनी अवतार, 14- भगवान नृसिंह, 15- वामन अवतार, 16- हयग्रीव अवतार, 17- श्रीहरि अवतार, 18- परशुराम अवतार, 19- महर्षि वेदव्यास जी, 20- हंस अवतार, 21- श्रीराम अवतार, 22- श्रीकृष्ण अवतार, 23- बुद्ध अवतार, 24- कल्कि अवतार

विष्णु के दश अवतार नाम लिस्ट

मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि

विष्णु के अवतार कितने है?

24

विष्णु के अवतार कौन कौन से हैं?

1- श्री सनकादि मुनि, 2- भगवान वराह अवतार, 3- नारद जी का अवतार, 4- नर-नारायण, 5- कपिल मुनि अवतार, 6- दत्तात्रेय अवतार, 7- यज्ञ, 8- ऋषभदेव, 9- आदिराज पृथु, 10- मत्स्य अवतार, 11- कूर्म अवतार, 12- भगवान धन्वन्तरी, 13- मोहिनी अवतार, 14- भगवान नृसिंह, 15- वामन अवतार, 16- हयग्रीव अवतार, 17- श्रीहरि अवतार, 18- परशुराम अवतार, 19- महर्षि वेदव्यास जी, 20- हंस अवतार, 21- श्रीराम अवतार, 22- श्रीकृष्ण अवतार, 23- बुद्ध अवतार, 24- कल्कि अवतार

विष्णु के कितने अवतार है?

प्रमुख – 10

टोटल – 24

विष्णु के 10 अवतार

मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि

निष्कर्ष

उम्मीद करता हूं कि आज का लेख भगवान विष्णु के कितने अवतार हैं, विष्णु के अवतार नाम और कथा का वर्णन? पसंद आई होगी, में हमेशा पूरा प्रयास और काफी रिसर्च करके लेख के द्वारा सभी पाठको तक जानकारी पहुंचता हूं ताकि किसी भी यूजर्स को जो हमारी हिंदीनोट वेबसाइट पर जिस जानकारी के लिए आया है उसे वो जानकारी मिले और उससे संतुष्ट होकर जाए ताकि दूसरी वेबसाइट पर जाकर सर्च न करना पड़े।

भगवान विष्णु के कितने अवतार हैं, विष्णु के अवतार नाम और कथा का वर्णन? लेख से आपको जरूर सीखने को मिला होगा, अगर फिर भी आपके दिमाग कोई कन्फ्यूजन हो तो इस आर्टिकल Bhagwan Vishnu ke Avtaro ke name के सबसे नीचे एक कमेंट बॉक्स होगा उसमें आर्टिकल से संबंधित प्रश्न और अपना email डालकर कमेंट करे, आपकी पूरी मदद की जाएगी।

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