उत्तराखंड सामान्य परिचय : इतिहास, संस्कृति, पर्यटन स्थल, राजकीय चिन्ह

उत्तराखंड सामान्य परिचय : इतिहास, संस्कृति, पर्यटन स्थल, राजकीय चिन्ह

उत्तराखंड का एक परिचय में आपको उत्तराखंड राज्य (Uttarakhand) राज्य के बारे में, उत्तराखण्ड के गठन से लेकर वर्तमान समय तक का इतिहास बताता है। उत्तराखंड का एक सामान्य परिचय (Uttarakhand General Introduction) में उत्तराखंड का इतिहास, प्राचीन नाम, राजधानी, गठन, भाषा, जिले, संभाग, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जनसंख्या, राजकीय चिन्ह, पुष्प, पक्षी, पशु, वृक्ष, खेल, छेत्रफल, भौगोलिक स्थिति, त्यौहार, लोक नृत्य, पयर्टन और धार्मिक स्थल आदि, की जानकारी दी गई है। चलिए

उत्तराखंड का सामान्य परिचय – उत्तराखण्ड एक परिचय हिंदी में

राज्य उत्तराखंड (Uttarakhand)
प्राचीन नामउत्तराँचल
राजधानी देहरादून
गठन09 नवंबर 2000
भाषा हिंदी
जिले13 जिले
संभाग 2 गढ़वाल और कुमाऊँ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
राज्यपाललेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह
जनसंख्या 100.86 लाख
राजकीय चिन्ह तीन पर्वत चोटियां, मध्य में
गंगा की चार लहरे
राज्य पुष्प ब्रह्म कमल
राज्य पक्षी मोनाल
राज्य पशुकस्तूरी मृग
राज्य वृक्ष बुरांश
राज्य तितलीकॉमन पीकॉक
राज्य वाद्यढोल
राज्य खेलफुटबॉल
राज्य गीत उत्तराखंड देवभूमि, मातृभूमि:, शत शत वंदन अभिनंदन
राज्य का क्षेत्रफल 53,483
भौगोलिक स्थितिराज्य का ग्लोब पर विस्तार 28°43’से 31°27′
उत्तरी अक्षांश तथा 77°34′ से 81°02′ पूर्वी देशांतर मध्य है।
राज्य की लंबाई लगभग 358 किमी तथा उत्तर से दक्षिण तक
चौड़ाई लगभग 320 किमी है।
पर्यटन स्थलजिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, उद्यान रामनगर,
जिला नैनीताल, नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान
धार्मिक स्थलयमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ
प्रमुख त्यौहार दीपावली, बसंत पंचमी, फूलदेई, हरेला,
घी सक्रांति, वट सावित्री, मकर सक्रांति
लोक नृत्यझोड़ा, चांदनी और छोलिया
वेशभूषा महिलाएं – घाघरा, आंगडी व पिछौडा
पुरुष – पजामा व कुर्ता
प्रमुख लोक कलाअल्पना (ऐपण )

उत्तराखंड एक परिचय एवं इतिहास । Uttarakhand Samanya Parichay

उत्तराखंड भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक राज्य है। यह अपने हिमालयी, भाबर, और तराई इलाको के लिए जाना जाता है। अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य एवं अनुकूलवातावरण के कारण यह हमेशा ही पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। 

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है। यहाँ की जनसंख्या लगभग 100.86 लाख है। यह भौगोलिक रूप से व्रहत हिमालय और गंगा के मैदान के बीच स्थित है। राज्य का ग्लोब पर विस्तार 28°43’से 31°27′ उत्तरी अक्षांश तथा 77°34′ से 81°02′ पूर्वी देशांतर मध्य है। पूरे भारत के सन्दर्भ में राज्य को मध्य हिमालय कहा जाता है। पूर्व से लेकर पश्चिम तक राज्य की लंबाई लगभग 358 किमी तथा उत्तर से दक्षिण तक चौड़ाई लगभग 320 किमी है। राज्य का क्षेत्रफल 53,483 है जो कि भारत के कुल क्षेत्रफल का मात्र 1.69 % है। क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे छोटा जिला चम्पावत व सबसे बड़ा जिला चमोली है। जिनका क्षेत्रफल क्रमश: 1766 वर्ग किमी व 8030 वर्ग किमी है। इसकी सीमा पूर्व में नेपाल, उत्तर में हिमालय पार (तिब्बत) चीन, उत्तर पश्चिम में हिमाचल प्रदेश तथा दक्षिण में उत्तर प्रदेश से लगती हैं। राज्य में कुल तेरह जिले हैं – उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, हरिद्वार, चमोली, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, उधम सिंह नगर, बागेश्वर, चम्पावत। 

उत्तराखंड में सामजिक व सांस्कृतिक स्थिति  

राज्य दो मंडलों , कुमाऊँ मण्डल व गढ़वाल मण्डल में विभाजित है। कुमाऊँ मण्डल में 6 व गढ़वाल मण्डल में 7 जिले आते हैं। कुमाऊँ के जिले- अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, चम्पावत, पिथौरागढ़और उधम सिंह नगर हैं। गढ़वाल के जिले- चमोली, देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी व उत्तरकाशी हैं। यहाँ की मुख्य भाषा हिन्दी है। कुमाऊँ के ग्रामीण अंचलों में कुमाऊँनी तथा गढ़वाल के अंचलों में गढ़वाली बोली जाती है। कुमाऊँनी व गढ़वाली भाषा को लिखने के लिए देवनागरी लिपि को प्रायोग में लाया जाता है। गढ़वाल के जौनसार भाबर क्षेत्र में जो भाषा बोली जाती है उसे जौनसारी कहते हैं।

भारत के सभी राज्यों का विभाजन भाषा एवं संस्कृति के आधार पर हुआ है। इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य की भी अपनी अलग संस्कृति है। 

रहन-सहन

उत्तराखंड एक पहाड़ी क्षेत्र है। यहाँ ठंड बहुत होती है इसलिए यहाँ लोगों के मकान पक्के होते हैं। दीवारे पत्थर की होती हैं। पुराने घरों के ऊपर से पत्थर बिछाए जाते थे। वर्तमान में लोग सीमेंट का उपयोग करने लग गये हैं। 

त्यौहार

उत्तराखंड में पूरे वर्षभर उत्सव मनाए जाते हैं। इनका नव वर्ष हिन्दू कलेण्डर के अनुसार चैत्र मास की शुरुआत के साथ माना जाता है।

यहाँ लगने वाले प्रमुख मेले

देवीधुरा मेला, वैशाखी मेला, पूर्णागिरी मिला, नंदा देवी मेला, उत्तरायनि मेला, गौचर मेला, ऐतिहासिक सोमनथ मेला, माघ मेला, विषु मेला, गंगा दशहरा, नंदा राजजात यात्रा। 

संक्रान्तियां

फूलसंक्रांति/ फूलदेई, हरेला, उत्तरायनि/ घुघुतिया, घी संक्रांति, मकरैणी , बिखौत। 

वेशभूषा

पारंपरिक रूप से उत्तराखंड की महिलाएं घाघरा, आंगडीव पिछौडा पहनती तथा पुरुष चूड़ीदार पजामा व कुर्ता पहनते थे स्त्रियों के आभूषणों में गलोबंद, नाक में नथ, टीका, कानो में कर्णफुलव हाथों में पौजी प्रमुख हैं। 

लोक कलाएं

यहाँ की लोक कला के तौर पर अल्पना (ऐपण ) प्रमुख हैं। इससे विभिन्न समारोहों में विविध प्रकार की चौकियां बनाई जाती हैं। गेरू से लीप कर उसके ऊपर चावल को भिगो कर बनाए गए लेप से आकर्षक चित्र बनाए जाते हैं। 

लोक नृत्य

झोड़ा, चांदनी और छोलिया यहाँ के प्रमुख नृत्य हैं। 

उत्तराखंड के राज्य प्रतीक चिन्ह

किसी वस्तु, चित्र, लिखित शब्द, ध्वनि या विशिष्ट चिन्ह को कहते हैं जो दूसरी किसी वस्तु का प्रतिनिधित्व करता है। उदाहरण के लिए प्रत्येक राष्ट्र में अपना एक झंडा है जो राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है। इसी प्रकार के कई अन्य प्रतीक चिन्ह भी हैं जो किसी भी राज्य या राष्ट्र की विशिष्टता का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

उत्तराखंड भारत के उत्तरी छोर पर स्थित एक राज्य है। इसका गठन नवम्बर 2000 को किया गया। उत्तराखंड के राज्य गठन के बाद 2001 में शासन द्वारा राज्य प्रतिको का निर्धारण किया गया। 

राज्य पुष्प ब्रह्मकमल

यह मध्य हिमालय क्षेत्र में 4000 से 6000 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम सोसुरिया अबवेलेटा है। उत्तराखंड में इसकी कुल 24 प्रजातियां पाई जाती हैं। उत्तराखंड के फूलों की घाटी, केदारनाथ, शिवलिंग बेस, पिंडारी ग्लेशियर आदि क्षेत्रों में यह बहुतायत में पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे कौल पद्म भी कहते हैं। 

राज्य पक्षी मोनाल

यह लगभग संपूर्ण हिमालय क्षेत्र में 2500 से 5000 मीटर की ऊँचाई वाले घने जंगलों में पाई जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम लोफोफोरस इंपीजेनस है। उत्तराखंड, कश्मीर, असम तथा नेपाल में स्थानीय भाषा में इसे मन्यार या मुनाल भी कहते हैं। 

राज्य पशु कस्तूरी मृग

यह हिमशिखरों पर 3600 से 4400 मीटर की ऊँचाई में पाया जाता है। यह केदारनाथ, फूलों की घाटी, उत्तरकाशी तथा पिथौरागढ़ जिले में 2000 से 5000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित जंगलों में पाये जाते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम मास्कस काईसोगौरस  है। इसे हिमालयन मस्क डियर के नाम से भी जाना जाता है। इसमे एक अद्वितीय सुगंध होती है। 

राज्य वृक्ष बुराँश

यह 1500 से 4000 मीटर की ऊँचाई में पाया जाता है। इसका रंग चटक लाल होता है। इसका वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रॉन अरबोरियम है। बुराँश वृक्षों की ऊँचाई 20 से 25 फीट होती है। यह एक सदाबाहर वृक्ष है। 

राज्य चिन्ह

यह भौगोलिक रूप से उत्तराखंड को झलकाता है। इसमे एक गोलाकर मुद्रा में तीन पर्वत की श्रंखला और नीचे गंगा की चार लहररों को दर्शाया गया है । बीच में स्थित  चोटी अन्य दो चोटियों से ऊँची है और उसके मध्य में अशोक की लाट अंकित है। लाट के नीचे ‘सत्यमेव जयते’ लिखा है। 

यह सभी प्रतीक चिन्ह राज्य के विभिन्न परिदृश्यों को दर्शाते हैं। इन सभी प्रतीकों से राज्य के पर्वतीय क्षेत्र एक सुंदर झलक मिलती है।

प्रमुख त्यौहार

भारत विविधताओं से भरा देश है। यहाँ के प्रत्येक राज्य में अपनी अलग भाषा। वेश- भूषा, पहनावा, खान- पान व त्यौहार हैं। उत्तराखंड में भी एक अलग भाषा व संस्कृति है। यहाँ भी कई त्यौहार मनाए जाते हैं। त्यौहारों की जीवन में बहुत महत्ता होती है। साल में कभी कभी मनाये जाने वाले ये दिन जीवन में छोटी छोटी खुशियाँ लेकर आते हैं। प्रत्येक त्यौहार का अपना एक विशेष स्थान व मतत्व होता है।

  • दीपावली – इसे बग्वाल भी कहा जाता है। दीपावली की रात को छिलके की रोशनी जला कर भैला खेला जाता है। साथ ही इस पर्व में गाय की पूजा की जाती है व उसे मीठा पकवान दिया जाता है।
  • बसंत पंचमी – यह हिन्दू कैलेंडर के माघ मास में आता है। इस शुभ अवसर के दौरान लोग बहुत अधिक श्रद्धा के साथ देवी सरस्वती की पूजा करते हैं।
  • फूलदेई – यह चैत्र मास के प्रथम दिन मनाई जाती है। इस दिन बच्चे घर घर जाकर देहली पर फूल चढ़ाते हैं।
  • हरेला – यह श्रावण मास के पहले दिन मनाया जाता है। इसे कर्क संक्रांति भी कहते हैं। इससे 10 दिन पहले 5 या 7 प्रकार के बीज बोये जाते हैं, और हैरेले के दिन इसे काटकर देवताओं को चढा़ते हैं।
  • बिखोती – इसे विषुवत संक्रांति भी कहा जाता है। इस त्यौहार को बैशाख माह के पहले दिन मनाया जाता है।
  • घी संक्रांति – यह त्यौहार सितम्बर के मध्य में आता है। इस दिन सिर में घी लगाया जाता है व कई प्रकार के पकवान बनाये जाते हैं।
  • वट सावित्री – यह ज्येष्ठ मास की कृष्ण अमावस्या को होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
  • मकर संक्रान्ति (घुघुतिया) – यह माघ माह के प्रथम दिन मनाई जाती है। इस दिन आटा, सूजी, नारियल और काई पचीजें मिलाकर घुघुते बनाये जाते हैं और इन्हें काले कौए को खिलाया जाता है।
  • खतडुवा – यह त्यौहार कुमाऊँ क्षेत्र में अश्विन माह के पहले दिन मनाया जाता है। यह मुख्यतः पशुओं का त्यौहार माना जाता है।
  • गंगा दशहरा – यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल दशमी या अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मई/जून के महीने में मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी की पूजा की जाती है।
  • भिरौली – यह त्यौहार संतान कल्याण के लिए मनाया जाता है।
  • नुणाई – यह त्यौहार जौनसार भाबर क्षेत्र में श्रावण माह में मनाया जाता है।
  • कलाई – यह त्यौहार कुमाऊँ में फसल काटने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
  • सारा – यह गढ़वाल में बैशाख माह में मनाया जाता है। इसमें नंदा देवी के दूतों की आराधना की जाती है।

उत्तराखंड एक पर्यटक स्थल

देवों के देव महादेव की निवास स्थली भूमि कैलाश को अपनी गोद में संजोए एवं पर्वतराज हिमालय की उपत्यकाओं में स्थित उत्तराखंड राज्य को प्रकृति के आलोकिक सौंदर्य का वरदान मिला है। हिमालय की गोद में स्थित उत्तराखंड राज्य की भूमि बड़ी ही पवित्र है।

पर्यटकों का आकर्षण केंद्र

देवभूमि उत्तराखंड में विश्वभर से पर्यटक आते हैं,इसके प्राकृतिक सौंदर्य को देखने यहाँ की पर्वत श्रृंखलाएँ, हरे भरे वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ वन्य जीव, तीर्थ स्थलों की पवित्र स्थली के दर्शन करने। हर वर्ष उत्तराखंड में हज़ारों की संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं।

प्रमुख पर्यटक स्थल

मुख्य राष्ट्रिय उद्यान। भारत के अनेक राष्ट्रीय उद्यानों में से कुछ इस राज्य में स्थित हैं। जैसे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान। यह उद्यान रामनगर, जिला नैनीताल में स्थित है। फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान और नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, चमोली जिले में स्थित है।

उत्तराखंड के धार्मिक स्थल

चार धाम

उत्तराखंड देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ कई प्रकार के देवताओं का वास है। यहाँ हर वर्ष कई पर्यटक घूमने आते हैं। यह अपनी चार धाम यात्रा के लिए भी प्रसिद्ध है। यह यात्रा मूलत: चार तीर्थ – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ की हैं। चार धाम उत्तराखंड की खूबसूरती को और अधिक निखारते हैं।

यमुनोत्री

यमुनोत्री, यमुना नदी का उद्गम स्थल है। यह उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह उत्तरकाशी जिले के बंदरपून्छ चोटी की 3923 मीटर की ऊंचाई में स्थित है। यहाँ देवी यमुना का मंदिर है। यह चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। यमुना नदी का श्रोत कालिंदी पर्वत है जो की मुख्य तीर्थ स्थल से एक किलोमीटर की दूरी पर है।

गंगोत्री

गंगोत्री समुद्र तल से 6140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गंगा नदी का उद्गम स्थल भी है। यह उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जिले में स्थित है। यह गंगोत्री नगर से 19 किलोमीटर दूर है। यहाँ का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तथा अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस है।

केदारनाथ

यह समुद्र तल से 11746 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह मंदाकिनी नदी का उद्गम स्थल के समीप है। केदारनाथ मंदिर की ऊँचाई 11755 फीट है। यह उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह लगभग 1200 साल पुराना मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह ऋषिकेश से 223 किलोमीटर की दूरी पर है।

बद्रीनाथ

यह नर नारायण पर्वतों के मध्य स्थित है। यह समुद्र तल से 10276 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। अलकनंदा इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाती है। यह मंदिर शंकुधारी शैली में बना हुआ है। इसकी ऊंचाई 15 मीटर है। इसके शिखर पर गुंबज है। मंदिर में 15 मूर्तियाँ हैं। यह चार धाम यात्रा का चौथा और अंतिम धाम है। यहाँ का समान्य तापमान 18 डिग्री सेल्सियस है।

यहाँ देहरादून, मसूरी, नैनीताल, अल्मोड़ा, चकराता, हरिद्वार, लैंसडाउन आदि पर्यटक स्थल हैं। यह खूबसूरत पर्यटक स्थलों के अलावा कई गतिविधियों का केंद्र भी है। इनमें औली में स्कीइंग की सुविधा, उत्तराखंड में कैंपिंग, हेमकुंड साहिब में ट्रैकिंग, वेली ऑफ फ्लॉवर्स, ऋषिकेश में राफ्टिंग, माउंटैनिंग, रॉक क्लाइंबिंग, बर्ड वॉचिंग, पैराग्लाइडिंग, वाइल्डलाइफ सफारी और गंगोत्री ग्लेशियर में ट्रैकिंग शामिल हैं।

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निष्कर्ष –

देवभूमि कहा जाने वाला उत्तराखंड न केवल प्राकृतिक संपदसम्पन्न है, बल्कि इसका सामजिक स्वरूप भी अद्भुत है। हालांकि समय के साथ लोगों के खान पान व रहन सहन में अंतर आया है परंतु अपनी संस्कृति को लोगों ने आज भी संजो कर रखा है। 

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