ईमेल पर निबंध : अर्थ कार्यप्रणाली लाभ हानि Essay on Email in Hindi

ईमेल पर निबंध अर्थ कार्यप्रणाली लाभ हानि Essay on Email in Hindi

Essay on Email in Hindi:- आज आपको ‘ईमेल पर निबंध‘ कार्यप्रणाली लाभ हानि विशेषता उपयोगिता Essay on Email in Hindi’ की जानकारी Email Par Nibandh के द्वारा दी गई है।

E-mail पर निबंध में ईमेल का अर्थ यानि ईमेल क्या है इसके के लाभ और हानि क्या है और ईमेल की कार्यप्रणाली का वर्णन एवं ईमेल की विशेषता, ईमेल की उपयोगिता, ईमेल और इंटरनेट में अंतर के साथ साथ ईमेल कैसे लिखे और भेजे की जानकारी भी ई-मेल पर निबंध हिंदी में के द्वारा बताने वाले हैं। चलिए शुरू करते हैं इमेल पर निबंध 10 लाइन।

ईमेल पर निबंध – Essay on Email in Hindi

प्रस्तावना :- इंटरनेट के बढ़ते प्रयोग के साथ ई-मेल के प्रचलन में भी वृद्धि हुई है। यह भी कहा जा सकता है कि ईमेल के प्रचलन ने इन्टरनेट के प्रयोग को बढ़ावा दिया है। ई-मेल आज दुनिया भर में सर्वाधिक लोकप्रिय संचार साधन का रूप ले चुका है। ई-मेल की लोकप्रियता एवं इसके बढ़ते प्रयोग का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले लोग व्यक्ति के घर या ऑफिस का पता पूछते थे, अब उसके ई-मेल का पता पूछते हैं।

ईमेल एक परिचय । ईमेल का अर्थ । Email an introduction in Hindi

ई-मेल में ‘ई’ का पूर्ण रूप है ‘इलेक्ट्रॉनिक’ एवं मेल’ का अर्थ होता है ‘डाक। इस तरह ई-मेल का तात्पर्य है – इलेक्ट्रॉनिक डाक। पारिभाषिक रूप से कहें तो ई-मेल सन्देश भेजने का ऐसा इलेक्ट्रॉनिक तरीका है, जिसके माध्यम से न सिर्फ सन्देशों को बल्कि कुछ डिजिटल दस्तावेजों को भी इसके साथ संलग्न कर सुरक्षित रखा जा सकता है एवं किसी अन्य ई-मेल पते पर भेजा जा सकता है। पहले ई मेल के माध्यम से दस्तावेजों एवं छवियों का आदान-प्रदान ही किया जाता था। अब ऑन-लाइन बातचीत का प्रयोग भी लगातार बढ़ रहा है और चैटिंग के माध्यम से हम किसी भी मुद्दे पर बहस कर सकते हैं।

ईमेल की शुरूआत

वैसे तो ई-मेल के विकास एवं इसके आधुनिक रूप प्रदान करने में कई वैज्ञानिकों का योगदान रहा हैं, किन्तु ई-मेल की शुरूआत करने के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका के कम्प्यूटर वैज्ञानिक रे टॉमलिंसन को ई-मेल का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने सर्वप्रथम सन् 1972 ई. में सिम्पल मेल ट्रान्सफर प्रोटोकॉल तकनीक का प्रयोग कर दूसरे कम्प्यूटर तक इलेक्ट्रॉनिक मेल प्रेषित करने में सफलता प्राप्त की थी। इसके बाद सामान्य प्रयोक्ताओं के लिए भी ई-मेल सेवा की शुरूआत हुई।

ईमेल की कार्यप्रणाली

ई-मेल पता के तीन घटक होते हैं -यूजरनेम, प्रतीक @ एवं डोमेन नेम। उदाहरण के लिए hindinote24@gmal.com में hindinote यूजरनेम एवं gmail.com डोमेन नेम है जिसके बीच में @ प्रतीक है।

यूजरनेम से इस बात का पता चलता है कि सन्देश भेजने वाला कौन है या किसके पास सन्देश जाना है एवं डोमेन नेम ई-मेल सेवा प्रदान करने वाले डोमेन का सूचक होता है।

ई-मेल के आविष्कार के बाद से अब तक इस तकनीक में काफी प्रगति हुई है।  इसके माध्यम से अब डिजिटल दस्तावेजों एवं चित्रों या वीडियो को भी संलग्न कर भेजा जा सकता है। 

जीमेल, हॉटमेल, याहूमेल इत्यादि ई-मेल सेवा प्रदाताओं के नाम हैं। किसी भी ई-मेल सेवा प्रदाता के मेल वाले वेबसाइट पर साइन-अप कर नए ई-मेल पते का निर्माण किया जा सकता है। कुछ सीमा तक यह सेवा बिल्कुल निःशुल्क है।

ई-मेल पते का निर्माण करने के बाद व्यक्ति को उस पते पर सन्देश भेजने एवं उसे सुरक्षित रखने के लिए कुछ स्थान प्रदान किया जाता है।

ईमेल के लाभ Benefits of email in Hindi

ई-मेल के कई लाभ हैं। इसका प्रयोग करना अत्यधिक सरल होता है। इसके माध्यम से हर रोज काफी संख्या में दस्तावेजों को व्यवस्थित कर प्रयोग में लाया एवं उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है।

ई मेल के माध्यम से भेजे गए सन्देश सुरक्षित तो रहते ही हैं, साथ में भेजे गए समय एवं दिनांक को भी इसमें सुरक्षित रखा जाता है, जो बाद में बहुत उपयोगी साबित होता है।

ई-मेल पता इन्टरनेट पर व्यक्ति की पहचान के रूप में भी कार्य करता है। इन्टरनेट की कई वेबसाइटों पर पंजीकरण करवाने में ई-मेल पते की आवश्यकता पड़ती है।

ई-मेल से होने वाला एक बड़ा लाभ इसकी गति है। इसके माध्यम से तीब्र गति से पृथ्वी के किसी भी कोने में सन्देशों को भेजा जा सकता है।

ई-मेल के माध्यम से प्राप्त सन्देशों को व्यवस्थित करना भी आसान होता है। आवश्यकता हो तो उसे पढ़िए अथवा मिटा दीजिए।

ई-मेल के माध्यम से संचार करना सुरक्षित एवं विश्वसनीय होता है। किसी विशेष व्यक्ति के ई -मेल पते पर भेजे गए सन्देश के खोने का खतरा नहीं होता। ई-मेल से प्राप्त सन्देश एवं संलग्न डिजिटल दस्तावेज को आगे अन्य पते पर ज्यों-का-त्यों अग्रसारित भी किया जा सकता है।

ई-मेल प्राप्त होने की स्थिति में उसी सन्दर्भ के साथ उसका जवाब देने का भी विकल्प प्रयोगकर्ता के पास रहता है। प्राप्त मेल को प्रिन्टर के माध्यम से प्रिन्ट भी किया जा सकता है।

ईमेल के नुकसान Disadvantages of email in Hindi

ई-मेल से यदि कई प्रकार के लाभ हैं तो इससे नुकसान होने की भी सम्भावना बनी रहती है। ठीक यही बात ई-मेल के साथ भी है। यदि सावधानी से इसका प्रयोग किया जाए तो निश्चित रूप से इसे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

यदि किसी ई-मेल का पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति को पता चल जाए तो वह इसका दुरुपयोग कर सकता है। इसलिए ई-मेल सुविधा का प्रयोग करने वाले व्यक्ति को इस सन्दर्भ में विशेष सावधानी की आवश्यकता पड़ती है।

इसके आतिरिक्त ई मेल पते को हैक किए जाने का खतरा भी बना रहता है। हैकिंग से बचने के लिए समय-समय पर पासवर्ड में परिवर्तन करते रहने की आवश्यकता पड़ती है।

ई-मेल के माध्यम से कम्प्यूटर वायरसों के हमले की भी सम्भावना बनी रहती है। अब तक दुनिया में जितने भी कम्प्यूटर वायरसों का हमला हुआ, उनके प्रसार में ई-मेल की भूमिका ही मुख्य थी।

एण्टी-वायरस सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर कम्प्यूटर वायरसों से होने व नुकसान से बचा जा सकता है। ई-मेल पर आने वाले स्पैम मेल भी ई-मेल से होने वाली परेशानी का एक कारण होते हैं।

ई-मेल की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसके माध्यम से एक बार में एक निश्चित सीमा तक ही दस्तावेजों एवं डिजिटल सामग्रियों को सम्प्रेषित किया जा सकता है।

ई-मेल की एक और कमी यह है कि ई-मेल से प्राप्त दस्तावेजों को कानूनी तौर पर प्रामाणिक नहीं माना जाता। इसलिए अब तक कानूनी दस्तावेजों को पारम्परिक डाक से ही भेजा जाता है।

एण्टी-वायरस सॉफ्टवेयर का प्रयोग, समय-समय पर इनबॉक्स की जाँच, स्पैम को मिटाते रहना, समय-समय पर पासवर्ड को बदलना एवं अवाछित ई-मेल से बचने जैसे उपायों से ई-मेल से होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

ईमेल की उपयोगिता और विशेषता । E-mail utility in Hindi

पर्यावरण के दृष्टिकोण से देखा जाए तो संचार के लिए पारम्परिक डाक सेवा के बदले ई-मेल का प्रयोग करने से कागज की बचत होती है।

पेड़ों की कटाई पर नियन्त्रण के लिए कागज के प्रयोग को कम करने की आवश्यकता है। पारम्परिक डाक से प्राप्त काग्जी दस्तावेजों की तुलना में भी ई-मेल के दस्तावेजों को सम्भालना अत्यन्त आसान होता है।

ई-मेल कई विज्ञापन कम्पनियों के लिए वरदान साबित हुआ है। इसके माध्यम से विज्ञापन करना भी आसान हो गया है। इसका प्रयोग अब व्यवसायों में भी खुब होने लगा है।

ई- मेल की सुविधा मनुष्य के लिए विज्ञान का वरदान साबित हुई है। इसके माध्यम से न केवल विभिन्न प्रकार की सूचनाओं तक मनुष्य की पहुँच हुई है, बल्कि उसे प्राप्त करना भी उसके लिए आसान हो गया है।

पहले ई-मेल प्राप्त करने के लिए इन्टरनेट के कनेक्शन एवं कम्प्यूटर की आवश्यकता पड़ती थी। अब ऐसी सुविधा प्रदान करने वाले मोबाइलों का भी निर्माण होने लगा है। संचार क्रान्ति में इन्टरनेट एवं ई-मेल की मुख्य भूमिका है।

उपसंहार –

जब से ई-मेल की सुविधा मनुष्य को मिली है जीवन में सूंचना आदान प्रदान सरल हो गया है। इसके द्वारा चंद सेकेंड में मनुष्य अपना संदेश या कोई दस्तावेज की छायाप्रति भेज सकता है। इसलिए ईमेल मानव के लिए वारदान साबित हुआ है।

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FAQ,s

Q- ईमेल क्या है इसकी परिभाषा क्या है?

Ans – ई-मेल में ‘ई’ का पूर्ण रूप है ‘इलेक्ट्रॉनिक’ एवं मेल’ का अर्थ होता है ‘डाक। इस तरह ई-मेल का तात्पर्य है – इलेक्ट्रॉनिक डाक। पारिभाषिक रूप से कहें तो ई-मेल सन्देश भेजने का ऐसा इलेक्ट्रॉनिक तरीका है, जिसके माध्यम से न सिर्फ सन्देशों को बल्कि कुछ डिजिटल दस्तावेजों को भी इसके साथ संलग्न कर सुरक्षित रखा जा सकता है एवं किसी अन्य ई-मेल पते पर भेजा जा सकता है। पहले ई मेल के माध्यम से दस्तावेजों एवं छवियों का आदान-प्रदान ही किया जाता था

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